आत्म-सम्मान

आत्म-सम्मान को परिभाषित करने के लिए हम ये बोल सकते है कि हम अपने बारे में कैसा महसूस करते हैं और हम अपने आप को कितना महत्त्व देते हैं।  

यदि एक बच्चे का पालन-पोषण ऐसे परिवार में होता है, जहाँ उसके माता-पिता उसके भावनाओं और विचारों का सम्मान नहीं करते हैं। तो वह बच्चा आगे चल कर कम आत्म-सम्मान वाला व्यक्ति बन जाता हैं। यदि एक बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से की जाती है, तो संभावना है कि वे ख़ुद के बारे में कुछ अच्छा महसूस ना कर पाएँ। ये बात उनके दिमाग़ में सदैव चलता रहता है और वास्तव में उनके जीवन के पाठ्यक्रम को बदल देता है।

कल्पना कीजिए कि जब तक आप जीवित रहते है तब तक 50 किलो के गेंद को अपने पैर से बाँध कर चलते है।  हम उस गेंद को नहीं निर्मित करते हैं, वह ज्यादातर समय उन लोगों के वज़ह से निर्मित होता है जो हमारे आस-पास होते है। जैसे कि माता-पिता, शिक्षकों, दोस्तों के बातों से आता है और यह विचार जीवन काल थक हमारे साथ रहता है। क्योंकि उनकी बाते हमारी मस्तिष्क में प्रवेश कर जाती है और घर बना कर बैठ जाती हैं।

एक साधारण से उदाहरण के साथ इस बात को समझने की कोशिश करते है। पाठशाला में एक बच्चे के रूप और उसके बातचित करने के तौर-तरीके को लेकर कुछ बच्चे उसका मजक उड़ाते है और वह बच्चा रोज़ इसी चीज को महसूस करता है। तब उन सब बातों का असर उस इंसान पर आगे जा के दूरगामी प्रभाव पड़ता है।  अगर ऐसा बार-बार हुआ तो ये विचार जड़ पकड़ लेते हैं। फिर ये सब बातें प्रभावित करते हैं कि वह बच्चा दुनिया को कैसे देखता हैं।  क्योंकि वे उस समय ख़ुद को बचाने के लिए कुछ नहीं करते। इस वज़ह से वे ख़ुद पर गुस्सा हो जाते हैं। यदि किसी बच्चे को अपनी पसंद का जीवन व्यतीत करने का आत्मविश्वास नहीं होता। तो वह ऐसा जीवन जीते है, जो उनके बारे में सच नहीं होती है। यदि वह ख़ुद को इस स्तर तक नापसंद करता है, जहाँ वह ख़ुद को अप्रभावी मानते है, तो वे अकेले रह जाते है।  उनका सामाजिकरण नहीं हो पाता। क्योंकि वे उपहास और अस्वीकृति से डरते हैं। इस डर से वे किसी के साथ घुलना-मिलना बंद कर देते है।

मेरा उद्देश्य आपको कुछ शुरुआती बिंदुओं की ओर ले जाना है। हम सभी जीवन की इस नाव में एक साथ हैं और हम सभी को कुछ संदेह आए दिन होते रहते है ख़ुद को लेके।  इन संदेहों को जीवन में जीतने नहीं देना चाहिए।



इन बिंदुओं को हमेशा याद रखना चाहिए जब आप आपने बारे में कम मेहसूस करते हैं दूसरों की तुलना में:

  • अपने विचारों और भावनाओं को पहचानें और उनका सम्मान करें।

  • जीवन को एक प्रक्रिया के रूप में देखें, समय की घटना नहीं।

  • हर कोई रास्ते में गलतियाँ करता है।

  • कोई निपुंड नहीं हर काम में।

  • आपनी आशंकाओं का गेंद ना बनाए।

  • खुद से सही सवाल पूछें।

  • नकारात्मक विचारों को दूर करें।

  • जीवन को जीना सीखें, ना की जीवन को काटना।

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