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HUMANITY

कच्चे – पक्के रिश्ते

कुछ कच्चे रिश्ते जो कच्चे आम जैसे होते है।

कुछ पक्के रिश्ते जो पक्के मकान जैसे होते है।

जो थोड़े खटे तो थोड़े मीठे होते है।

जो थोड़े मज़बूत तो थोड़े खाली होते है।

कुछ कच्चे घरों में पक्के रिश्ते बन जाते है।

तो कुछ पक्के घरों में कच्चे रिश्ते बिखर जाते है।

रिश्ते कैसे भी हों लोग उन्हें निभा जाते है।

कुछ मन के रिश्ते दिलों को जोड़ जाते है।

तो कुछ बेमन के रिश्ते दिलों को तोड़ जाते है।

कुछ कच्चे धागों में बंधे पक्के रिश्ते होते है।

तो कुछ पक्के धागों में बंधे कच्चे रिश्ते भी होते है।

इस जोड़-तोड़ के सिलसिले में ज़िन्दगी बीत जाती है।

शकल बदल जाती है पर रिश्ते वही रह जाता है।

रिश्ते कैसे भी हो लोग उन्हें निभा जाते है।