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HUMANITY

इंसान बनते है।

इंसानियत कोई जाति नहीं है। यह कोई व्यक्ति या लोग नहीं है।
यह कुछ ऐसा है जो हम खुद से पूछते हैं। इंसानियत का सवाल है।
क्या हम इंसान को निष्पक्ष रूप से एक समान दिखेंगे?
क्या हम अपना भरोसा प्यार और सिर्फ प्यार पर रखेंगे?
हम इंसानियत के इस सवाल का जवाब अपने दम पर देने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन एक-दूसरे पर विश्वास किए बिना ऐसे ही जीते रहे तो हम भीड़ में अकेले ही अपना जीवन व्यतीत करते रहेंगे।

चलो आज फिर इंसान बनने की कोशिश करते हैं।
क्यों कि हमने उस इंसान को कहीं खो दिया है।
आने वाले कल से लड़ने के लिए योद्धा को तयार कर लिया है।
पर भूल गए की वह युद्ध में बेहने वाला खून इंसान का ही है।

चलो आज फिर इंसान बनने की कोशिश करते हैं।
क्या हम वहीं बने है जो हमे बनना चाहिए हैं?
सच तो ये भी है कि हम जटिल बनना चाहते हैं।
पर जटिल बनने के राह में भूल गए विनम्र भी होना जरूरी हैं।

चलो आज फिर इंसान बनने की कोशिश करते हैं।
हमारे लिए इसका क्या मतलब है?
क्या हम कुछ करते है उस इंसान को बनाए रखने के लिए?
या फिर ये सिर्फ हमारे शब्दों और विचारों से ही लिपटा है।

चलो आज फिर इंसान बनने की कोशिश करते हैं।
समय की विडंबना ये है कि हमें इंसान बने रहना चाहिए।
ताकि दुनिया में इंसानियत शुरक्षति रहे।