युद्ध

दुनिया में युद्ध छिड़ी हुई है और ये युद्ध दो प्रकार के हो रहे है। एक युद्ध वह जो नज़र आती है और दूसरी वह जो नज़र नहीं आती है। जो नज़र आती है उसका तो हाल मिल जाता है। परन्तु जो नज़र नहीं आती है उसका हल कैसे निकला जाए? नज़र आने वाले युद्ध … Continue reading युद्ध

घर

घर वह नहीं जो ईंट, पत्थर, सीमेंट, सरिया और बालू से बनाते है। बल्कि वह होता है जहाँ चार लोग मिल-जुल कर साथ रहते है। घर वह है जो प्यार, विश्वास और एकता से बनता है। घर का हर कोना हमे कुछ ना कुछ सीख देता है। देहलीज हमे यह सीख देती है की, जैसे … Continue reading घर

उम्मीद से आशा तक की सफ़र

उम्मीद की तरंग वह जो सूरज की किरणों-सी होती है। किरणों की रोशनी वह जो ज्वाला बन आगे बढ़ना सिखाती है। आग की ज्वाला वह जो मशाल बन राह दिखाती है। मशाल की तपन वह जो पतन से लड़ने की ऊर्जा देती है। ऊर्जा की शक्ति वह जो सबर करना सिखाती है। सबर की गरिमा … Continue reading उम्मीद से आशा तक की सफ़र

नारी

नारी हूँ, अबला बेचारी नहीं। नारी हूँ और बल से चारो खाने चित करना भी जानती हूँ। चुप चाप सुनती हूँ, बेजुबान नहीं। चुप चाप सुनना जानती हूँ और ज़ुबान से दहाड़ना भी जानती हूँ। नज़रे झुकाती हूँ, शर्मिंदा नहीं। नज़रे झुकाना जानती हूँ और नज़रे उठा के शर्म सीखा भी सकती हूँ। ख़ुद से … Continue reading नारी

Journey

Life is a journey in which, there are so many tiny-tiny journeys. Every journey has a destination to accomplish. Some are long while some are short. Every journey has a different experience. Some are memorable and some are productive. Destinations are determined by the desires of humans. But the desires are controlled by the mind. … Continue reading Journey

प्रतिज्ञा

चलो आज स्कूल के समय की बातें याद करते है! हमने सुना है कि भारत को विविधता में एकता के रूप में परिभाषित किया जाता है। हमारा देश अनेक धर्मों और संस्कृतियों का मेल है। लेकिन जब मैंने इसे ज़मीन सतर पर देखा तो ऐसा नहीं लगता। जैसा हमने स्कूल के समय में सुना था। … Continue reading प्रतिज्ञा

आत्म-विश्लेषण

हम मानव इतिहास के एक ऐसे समाज बन गए है, जो एक अकेला समाज बन चुका है। अकेले इसलिए क्योंकि यहाँ हर दूसरे व्यक्ति को लगता है कि अब वह इस धरती पर किसी के करीब नहीं हैं। हम जानते है कि किसी को ऐसे विचार क्यों आते हैं। लेकिन समस्या यह है कि हम … Continue reading आत्म-विश्लेषण

पहचान

किसी की काया उसके वजूद की पहचान नहीं होती है।किसी की वजूद उसके काम से होती है।ना की किसी के रंग या रूप के आधार पर होती है।इंसान की पहचान उसके सूरत से नहीं, सीरत से होती है।सीरत की पहचान उनके आदत और व्यवहार से होती है।किसी की पहचान किसी नाम की मोहताज नहीं होती … Continue reading पहचान

सफ़रनामा

जिंदगी एक सफ़र है, इस सफ़र में कई छोटे बड़े सफ़र आते है। हर सफ़र का कोई ना कोई मुकाम होता है। हर सफ़र का अनुभव अलग होता है। किसी की सफ़र लंबी, तो किसी की छोटी होती है। सफ़र लंबी या छोटी इसका फ़ैसला मंज़िल करती है। पर मंज़िल तो इंसान की इच्छाएँ तय … Continue reading सफ़रनामा

इंसान की इंसानियत

इंसान तू भूल चला इंसानियत। पर उसी इंसानियत ने तुझे जीवन दिया है। तू अहंकार में सब भूला के चले या अहंकार भूला के सब के साथ चले। मर्जी तेरी इंसानियत को जीताए या हैवानियत को। जो तू हैवानियत को जीताए, फिर तो तू भूल गया कि, उसी इंसानियत ने जीवन दान दिया इस धरती … Continue reading इंसान की इंसानियत